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"वो पूनम की रात "

Posted On: 28 Feb, 2014 Contest में

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“वो पूनम की रात ”

अलसाई धरती ने अंगड़ाई ली कि इंद्रधनुषी फूलों की छटा बिखर उठी
भीनी भीनी पुरवा ने योवन मदमाया तो ऋतुराज वसंत ने किंशुक में दहन भी रोपा !

साहित्य में ऋतू वसंत का वर्णन अतुलनीय माना जाता रहा है ! आदि काल से लेकर आधुनिक काल के साहित्य कारों ने न जाने कितनी बार वसंत के विभिन्न मनमोहक , सार्थक , दाहक रूपों की अपने अपने ढंग से सुंदर सरस रोचक व्याख्या की है ! ऋतुराज की महिमा के वर्णन करने के लिए तो वैविध्यता में भाव शब्द और लेखनी की क्षमता संकुचित हो नतमस्तक हो उठती है, किन्तु हाँ ऋतुराज वसंत प्रसाद स्वरुप रसास्वादन के लिए जीवन के मधुर रसों को सहज स्व्तः धारण कर प्रकृति को उपकृत अवश्य कर देते हैं !

किरण यानि मैं और रवि नई- नई नौकरी में एक साथ ही लगे थे ! २१ वीं सदी का स्वागत करते युवा आधुनिक परिवारों के प्रतिबिम्ब , सामाजिक व्रजनाओं से बे परवाह थे हम ! कुछ ही मुलाकातों में प्रेम की पींगे पनपने लगीं ! पुरानी फिल्मों के नायक – नायिकाओं के तरह हम न थे कि फ़िल्म के मध्यांतर तक दिल कि बात ही न कह पाएं ! जल्द ही हमने एक दूजे का होने का दम भर, पारिवारिक स्तर पर विवाह कि तारीख भी निकलवा ली !
फिर क्या था , रुमानियत से भरपूर शख्सियत रवि ने तो अब खुले आम ही नज़रों से अधरों का दोहन करने में कोताही बरतना छोड़ दिया , ऊपरी नोक-झोंक के बावजूद दिल कि गहराइयों में यह सब बहुत भाता था ! आलम यह था किसी दिन वह काम पर न आये तो मैं अपने काम पर गुणवत्ता नहीं दे पाती थी हर वक़्त मोबाइल पर ही अटकी रहती थी कमोबेश यही हाल रवि का भी था ! दीवानगी भी ऐसी सहकर्मियों की तिरछी निगाहों , कटाक्ष करती नज़रों और घूरती आखों के बीच भी , जानते बूझते , अनजान बन हम जब इक्क्ठे काम कर रहे होते तो हमारे काम की गुणवत्ता का कोई मुकाबला न था ! नहीं जानते ,यह दिल दिमाग की अनगिनत परतों की क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण था या नये नये प्यार के अहसास का कमाल था , भविष्य की रंगीनियों भरी मधुर कल्पनाओं का पड़ाव था या निष्ठा , लगन, समर्पण व् आपसी तारतमयता का परिणाम था !

जो भी था , हमारे द्वारा किये गए काम कि गूँज से “टॉप मैनेजमेंट” भी खुश था ! शायद यही कारण रहा होगा कि एक “प्रोजेक्ट” के सिलसिले में मेरा और रवि का चयन दो दिन के लिए कश्मीर भेजने के लिए किया गया ! आम के आम गुठलियों के दाम , दिल बल्लियों उछल रहा था ! मुझे रवि के साथ जाने की कल्पना ही रोमांचित किये जा रही थी !

मूल्य आधारित मध्यम वर्गीय संस्कारित माता पिता द्वारा उत्साहित वैवाहिक तयारियों के बीच यह सूचना उनके चेहरे पर चिंता और हर्ष का मिश्रित भाव उजागर कर रही थी ! नए ज़माने के नए रंग ढंग में माता पिता द्वारा बच्चों को “बी केयरफुल ” कहना ही बचपन से बड़े होने तक कि लगभग सभी, कही अनकही हिदायतें शरीक कर लेता है !

एक तो दिल्ली में वसंतोत्सव की गहमा गहमी ,फूलों उपहारों और कार्ड्स का लुभावना आयाम उस पर कश्मीर में वादियों का दिलकश अंदाज़ सब कुछ भुला , खुद में खो जाने को बेताब करती फिजायें !
रही सही कसर , मंगेतर रवि की जवांदिली पूरी कर रही थी ! दिल तितली सरीखा फूलों रुपी पलों का रस पी रहा था !

दिए गए “असाइन्मेंट” को भी हम बखूबी अंजाम दे रहे थे और सीनियर्स के साथ लगातार कनेक्ट भी थे ! सुरक्षा कारणो से शाम ६ बजे तक हम अपने होटल में थे , ८ बजे तक हमने अगले दिन के काम का खाका तैयार किया और फिर डिनर के लिए वहीं रेस्टोरेंट में संजीदगी के साथ आंखों में आँखे डाले बतियाने लगे ! तभी होटल में अनाउंसमेंट हुई कि दो घंटे के लिए रेगुलर एक्सरसाइज़ के तहत ९ बजे से “ब्लैक आउट” होगा सभी अपने अपने कमरों में पहुंचे ! बड़ा ही अजीब सा महसूस होने लगा अँधेरे के नाम पर मेरे चेहरे के हवाइयां उड़ी हुई थीं, अत्तीत की धुंधली सी परछाइयों में , छुटपन में पडोसी ने विकृत मानसिकता के चलते अँधेरे का लाभ उठाने की कोशिश की तब माँ ने कड़कती बिजली की चमक के साथ मुझे खींच अपने दामन में छुपा बचा लिया था किन्तु अँधेरे का डर बैठ गया था !

९ बजे से पहले ही रवि ने मेरे कमरे में दस्तक दे पूछा की क्या ब्लैक आउट का समय वह मेरे कमरे में मेरी खिड़की की तरफ से दिखायी दे रहे पूनम के चाँद की रौशनी में गप शप के साथ बिता सकता है ? मेरे न कहने का सवाल ही नहीं था, इस अनजानी जगह पर अंधेरे के डर से बचने के लिए अपने मंगेतर के साथ से बढ़ कर क्या हो सकता है ?

घुप्प अंधेर के दौरान स्वच्छ आसमान में तारों की विस्तृत चादर के बीच पूनम का चाँद अपनी चन्द्र रश्मियों द्वारा उन्मुक्तता बिखेर हिमाच्छादित्त चोटियों को चांदी सा सजा रहा था ! सोफे पर बैठ खिड़की से निहारते – गुनगुनाते ,कुछ मदमाते – सकुचाते , भावनाओं के ज्वारभरी शोखियाँ समेटते, यह दृश्य हम अपने दिल में उतारते जा रहे थे कि देखते ही देखते उमड़ घुमड़ कर बादलों ने चमकते चाँद को घेर लिया और सरसराती हवाएं तूफ़ान बनने लगीं और झमा झम बारिश अपना रूप बढ़ाने लगी ! सुना था पहाड़ों कि बारिश बहुत शोर मचाती है इस वक़्त हम इसे बहुत शिद्दत से महसूस कर रहे थे , न तो बिजली आने को थी न बारिश थमने को थी !

सुबह जब आँख खुली तो हमने अपने आप को सोफे पर ही पाया, बाहर आसमान साफ़ नज़र आया हम दोनों ही तुरंत काम पर जाने के लिए तैयार होने के उपक्रम में लग गए इतने में पता चला कि रात के तूफ़ान के कारण प्रोजेक्ट साईट पर और आस पास के इलाके में काफी नुक्सान हो गया है और हमें अभी दिल्ली जाना है दोपहर तक हम दिल्ली मैं थे !

तूफ़ान की खबर के मद्देनज़र परिवार में भी चिंता हो गयी थी पर जब माँ की नज़रों से मेरी गर्वीली नज़रें मिली तब जा कर उनके दिल को सुकून मिला !

यह क्या ? इसी बीच कंपनी के एम डी ने रवि को ८ महीने के लिए अपने साथ अफ्रीका ले जाने का निर्णय ले लिया , ४ दिन में ही रवि का वीसा और टिकट तैयार था जब कि शादी की तारीख में अभी १५ दिन बाकी थे ! हम दोनों के साथ हमारे परिवार भी काफी उहापोह की स्थिति मैं थे ! अंततः यह निश्चित हुआ की अफ्रीका से वापस आने के बाद ही शादी होगी !

रेडियो पर बज रही गाने की पंक्तियाँ “तुम बिन जीवन कैसे बीता पूछो मेरे दिल से ………….” सच मुच में हमारे दिल का हाल बयान कर रही थी !

जीवन में सब कुछ हमारी ही योजना अनुसार नहीं हो पता यह भी एक अटल सत्य है ! यहाँ पर धैर्य की परीक्षा शुरू हो जाती है ! एक एक दिन युग जैसा लगता था चेहरे की मुस्कराहट कागज़ के फूल सी हो गयी थी !फ़ोन ज़रूर इस समय राहत देता था और कश्मीर की वादियों के पलों की खुश्बू दिलो दिमाग तारो ताज़ा कर जाती थी !
जैसे तेसे दिन गुजरने लगे ८ महीने बाद भी १० दिन १५ दिन कर के पूरे १० महीने निकल गए तब जाकर रवि वापस आये तो लगा जैसे मेरी भी जान में जान आयी ! अब शादी की तारीख बसंत ऋतू की माघी पूनम तय हो गयी !

वही पूनम, जिस रात एक साल पहले हम कश्मीर में थे !

विवाह उपरान्त किंशुक के दाहक सौंदर्य के बीच , मधुयामिनी की प्रणयवेला में जब मैंने रवि से जानना चाहा कि उस न भूलने वाली उद्वेलित रात में , मैं समर्पिता सी थी, तो संस्कार और विश्वास के धरातल पर प्रेम पाश से मुझे आबद्ध कर , जीवन के सबसे ख़ूबसूरत खिलते रसीले महकते बसंत को हर पल का साथी बना लिया और अंतर्मन को चिरकाल के लिए प्यार के सच्चे अटूट बंधन में बाँध लिया,

यह कह कर कि….. ” मैं समर्पिता तो थी परिणीता नहीं” …

अटल प्यार क्षणिक वासना नहीं , आस्मां कि ऊंचाई और सागर की गहराई नापने के लिए होता है !

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 28, 2014

सार्थक और समयानुकूल प्रस्तुति के लिए बधाई !!

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 28, 2014

समयानुकूल सार्थक प्रस्तुति ! बधाई !!

vidhugarg के द्वारा
March 22, 2014

धन्यवाद


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